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Mukhtar Ansari Latest Updates and News- जेल ट्रांसफर से जुडी सभी ताज़ा खबर व अपडेट

मुख्तार अंसारी-पूर्वांचल का डॉन 

Mukhtar

एक ऐसा नाम जिसके बारे में आप सब ने कभी न कभी जरूर सुना होगा। आज कल यह नाम एक बार फिर से चर्चा में है। 
आज के इस आर्टिकल में हम मुख्तार अंसारी, पूर्वांचल के डॉन के बारे में लेटेस्ट न्यूज, जेल से जेल ट्रांसफर और मुख्तार अंसारी, पूर्वांचल के डॉन के इतिहास के बारे में जानेंगे कि कैसे एक सभ्य इज्जतदार और अच्छे खासे राजनीतिक दखल वाले परिवार से आने वाला मुख्तार अंसारी, पूर्वांचल का डॉन बन गया।

मुख्तार अंसारी की पारिवारिक पृष्ठभूमि

मुख्तार अंसारी, पूर्वांचल के डॉन के बारे में लेटेस्ट न्यूज जानने से पहले हम मुख्तार अंसारी के अतीत के बारे में जान लेते हैं। पॉलिटिकल बैकग्राउंड से आने वाले मुख्तार अंसारी के दादा जी का पूरा नाम मुख्तार अहमद अंसारी था जो की भारत की आज़ादी की लड़ाई में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।

मुख्तार अंसारी के दादा जी जो की गांधी जी के बहुत करीबी थे और आज़ादी के कई आंदोलनों में उन्होंने गांधी जी के साथ भाग लिया था। वर्ष 1926-27 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। मुख्तार अंसारी के नाना जी जो की आर्मी में ब्रिगेडियर थे, ने प्रसिद्ध नौसेरा की लड़ाई में अगुआई की जिसके लिए उन्हें महावीर चक्र से भी सम्मानित किया गया। उनका नाम था ब्रिगेडियर उस्मान जिसे आज भी भारतीय सेना में बड़े ही इज्जत के साथ लिया जाता है।

मुख्तार अंसारी के पिता जी शुभानुल्लाह अंसारी जो की एक कम्युनिस्ट लीडर थे, बहुत ही इज्जतदार एवम स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति थे। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की जब उन्होंने पालिका चुनाव के लिए नामांकन का पर्चा भरा था तो निर्विरोध रूप से चुनाव जीत गए क्योंकि उनकी स्वच्छ छवि और ईमानदार व्यक्तित्व के कारण अन्य सभी उम्मीदवारों ने स्वेच्छा से अपना नामांकन वापस ले लिया था बिना किसी दबाव के उनके सम्मान में।

इतिहास के अलावा बात अगर मुख्तार अंसारी की अगली पीढ़ी की करी जाए तो मुख्तार अंसारी के बेटे जिनका नाम अब्बास अंसारी है, एक अंतराष्ट्रीय स्तर के स्पोर्ट्स पर्सन हैं। उन्होंने शॉर्टगन शूटिंग में नेशनल चैंपियन के साथ ही कई सारे अंतराष्ट्रीय इवेंट्स में भी पदक जीते हैं। श्री हामिद अंसारी जो की दो बार भारत के उप राष्ट्रपति रह चुके हैं, मुख्तार अंसारी के चाचा जी हैं।

मुख्तार अंसारी का शुरुआती जीवन

मुख्तार अंसारी एक रौबदार व्यक्तित्व, कद काठी ऐसी की हज़ारों की भीड़ में भी खड़ा हो तो भी अलग से ही पहचान में आ जाए। 7 फुट की ऊंचाई वाले मुख्तार अंसारी को खेल से बेहद लगाव था। हॉकी, क्रिकेट फुटबॉल के शौकीन मुख्तार अंसारी को जानने वाले लोगों के अनुसार यदि मुख्तार अंसारी डॉन न होता तो शायद भारतीय क्रिकेट टीम का एक प्रमुख तेज गेंदबाज ज़रूर हो सकता था।

मुख्तार अंसारी पूर्वांचल का डॉन कैसे बना

मुख्तार अंसारी के पूर्वांचल के डॉन बनने की कहानी किसी हिंदी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 80 के दशक से पहले उत्तर प्रदेश का पूर्वी भाग जिसे सामान्यता पूर्वांचल के नाम से भी जाना जाता है, विकास के मामले में काफी पिछड़ा हुआ क्षेत्र था।
Don Mukhtar

80 के दशक की शुरुआत में सरकार के द्वारा पूर्वांचल क्षेत्र के विकास के लिए कई सारी योजनाओं जैसे रेलवे के ठेके, स्क्रैप का काम, देशी शराब के ठेके आदि की घोषणा की गई। इस समय पूर्वांचल में मुख्य तौर पर दो गैंग्स मखनू सिंह गैंग और साहिब सिंह की गैंग का बोल वाला था। मुख्तार अंसारी पूर्वांचल का डॉन बनने से पहले मखनु सिंह की गैंग के साथ जुड़ा हुआ था।

मुख्तार अंसारी - पूर्वांचल के एक डॉन और दूसरे डॉन ब्रजेश सिंह के बीच संघर्ष

मुख्तार अंसारी का सबसे बड़ा दुश्मन था बृजेश सिंह जिससे आज तक उसका गैंग बार जारी है। मुख्तार अंसारी ने जहां मखनू सिंह के गैंग से अलग होकर अपना नया गैंग बनाया वहीं बृजेश सिंह जो की साहिब सिंह गैंग के साथ जुड़ा हुआ था, ने साहिब सिंह गैंग से अलग होकर अपना नया गैंग बनाया।

शुरुआत में मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह के बीच किसी प्रकार की निजी दुश्मनी नहीं थी लेकिन मुख्तार अंसारी के दुश्मन त्रिभुवन सिंह से जेल में मिलने के बाद बृजेश सिंह ने अपनी गैंग में शामिल कर लिया। यही मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह के बीच दुश्मनी की वजह बन गई जो अब तक जारी है।

किसी भी प्रकार का सरकारी ठेका चाहे वो रेलवे हो शराब हो स्क्रैप हो या पीडब्ल्यूडी, मुख्तार अंसारी का इन ठेकों पर सिक्का चलता था जिसे अब 24 साल के बृजेश सिंह ने खुले तौर पर चुनौती देना शुरू कर दिया था।इन दोनो गैंग्स में होने वाली गैंग वार्स के बीच साल 2001 में आमने सामने की मुठभेड़ हुई जिसमें मुख्तार अंसारी घायल हो गया और बृजेश सिंह की मौत की अफवाह फेल गई।

हालांकि ये बस एक अफवाह मात्र थी और साल 2008 में बृजेश सिंह को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया गया।

मुख्तार अंसारी का दबदबा

29 नवंबर 2005 को मोहम्मदाबाद सीट से मुख्तार अंसारी के बड़े भाई को विधायकी के चुनाव में हराने वाले कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई। कृष्णानंद राय को चुनाव में बृजेश सिंह सपोर्ट कर रहा था। कृष्णानंद राय के काफिले को घेर कर 7 लोगो ने AK47 से लगभग 400 राउंड गोलियां फायर कर के हत्या कर दी। इस हमले में मारे गए 7 लोगों के शरीर से 69 राउंड गोलियां मिली थी।

किसी राजनीतिक व्यक्ति पर इस तरह से हमला कर हत्या किए जाने का इससे बड़ा मामला तब तक नहीं हुआ था। जिस वक्त कृष्णानंद राय की हत्या की गई उस समय मऊ में हुए दंगो के मामले में नाम आने के कारण मुख्तार अंसारी जेल में बंद था। इस पर आरोप लगे की उसने जेल में रहकर अपने गुर्गों मुन्ना बजरंगी, गोरा राय आदि से इस घटना को अंजाम दिलाया था।

मुख्तार अंसारी बनाम योगी

साल 2005 में हुए मऊ दंगो में मुख्य तौर पर मुख्तार अंसारी को आरोपी माना गया था जिसके कारण वह कृष्णानंद राय हत्याकांड के समय जेल में बंद था। ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे जिसमे मुख्तार अंसारी को मऊ दंगो के दौरान खुली जीप में ऊपर बैठ कर घूमते हुए देखा गया था।

इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो की उस समय गोरखपुर से सांसद थे ने मऊ जाकर दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की बात कही थी लेकिन दंगा पीड़ितों से मिलने के प्रयास को राजनीतिक दबाव में रोक दिया गया।

मुख्तार अंसारी उस समय बीएसपी से विधायक था और राजनीतिक दबाव से उसने योगी आदित्यनाथ को मऊ दंगा पीड़ितों से मिलने से रुकवा दिया। इस घटना के 3 साल बाद योगी आदित्यनाथ के काफिले पर हमला किया गया जिस आरोप भी मुख्तार अंसारी पर ही लगाया गया था। 

मुख्तार अंसारी का राजनीतिक सफर

मुख्तार अंसारी ने 90 के दशक में राजनीति में कदम रख दिया था। कभी निर्दलीय तो कभी एसपी और कभी बीएसपी के चुनावी टिकट पर चुनाव लडा और चुनाव जीतकर विधायक बना। सूबे में किसी की भी सरकार हो मुख्तार अंसारी के प्रभाव में कभी कमी नहीं आई।

वर्तमान समय में भी मुख्तार अंसारी मऊ विधान सभा सीट से बीएसपी का विधायक है। विधायक पद से हटाए जाने के लिए वर्तमान समय में विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित जी के पास एक याचिका विचाराधीन है। इस संबंध में गत 4 नवंबर 2020 को वाराणसी के रहने वाले  सुधीर सिंह ने, मुख्तार अंसारी को विद्यायक पद से हटाने के लिए यह याचिका दायर की है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 190 के अनुसार यदि लगातार 60 दिनों तक कोई सदस्य बिना किसी पूर्व सूचना के सदन कार्यवाही से अनुपस्थित रहता है तो उसकी सदस्यता को सदन के द्वारा समाप्त कर उस सीट को रिक्त घोषित कर दिया जा सकता है।

मुख्तार अंसारी का जेल आवागमन

प्रदेश सरकार के अनुसार मुख्तार अंसारी के खिलाफ 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं।साल 2005 से मुख्तार अंसारी जेल में बंद है और समय समय पर पैरोल पर बाहर आता रहा है। उत्तर प्रदेश में कभी आगरा तो कभी मथुरा या फिर बांदा आदि जेलों में लगातार उसका तबादला होता रहा है। जेल कोई भी हो लेकिन मुख्तार अंसारी के किसी भी काम में कभी भी कोई रुकावट नहीं आई।

आखिरी बार पंजाब की रोपड़ जेल जाने से पहले वह उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में ही बंद था। इस जेल की गिनती भारत की सबसे सख्त कही जाने वाली जेलों में की जाती है जिसके कारण इस जेल को कालापानी की जेल भी कहा जाता है।
बीते कुछ सालों से मुख्तार अंसारी पंजाब के रोपड़ जेल में ही बंद था जहां से उसे वापस बांदा जेल में लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है ताकि उसपर लंबित मुकदमों की कार्यवाही पूरी की जा सके।

मुख्तार अंसारी की 16 साल पहले की गई गलती की सजा?

साल 2005 में जब मुख्तार अंसारी का नाम मऊ दंगो से जोड़ा गया तब राजनीतिक दबाव में उसने सरेंडर कर दिया। इसी बीच गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्य नाथ ने मऊ जाकर दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की बात कही पर मऊ दंगा पीड़ितों से मिलने जाने के समय उन्हें दोहरी घाट पर रोक दिया गया।  

इस घटना के लगभग 3 साल बाद आजमगढ़ जाते समय उनके काफिले पर हमला कर दिया गया। मुख्तार अंसारी को ही इसका दोषी माना गया और उस समय योगी आदित्य नाथ ने हमला करने वालों के विषय में संकेत भी किया था कि 'गोली मारने वाले को जबाव दिया जायेगा, उसी की भाषा में।' 

मुख्तार अंसारी की रोपड़ जेल से बांदा वापसी

मुख्तार अंसारी को पंजाब के रोपड़ जेल से बांदा जेल वापसी की घटना थोड़ी अप्रत्याशित है। इस प्रकार की घटना पहली बार घटित हुई है जब किसी कैदी को अन्य प्रदेश की जेल से वापस अपने प्रदेश की जेल में लाने के लिए इतने उतावले तौर पर राज्य सरकार द्वारा, सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी गई हो।

हालांकि मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से वापस उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश भी पारित कर दिया और स्वास्थ्य सही न होने के कारण एंबुलेंस के द्वारा उसे बांदा जेल भी पहुंचा दिया जा चुका है।

मुख्तार अंसारी के पतन की शुरुआत

साल 2016 से पहले अपनी राजनीतिक शक्ति के नशे में चूर मुख्तार अंसारी ने शायद ही ऐसा कभी सोचा होगा की किस्मत इस तरह से करवट बदलेगी। जिसे घमंड था की राज्य में सरकार चाहे जिसकी भी हो उसके नाम का सिक्का हमेंशा चलता रहेगा।
Mukhtar Family

वर्ष 2017 की शुरुआत से ही उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्तार अंसारी और उसकी गैंग पर शिंकजा कसना शुरू कर दिया था। उसकी सभी नाजायज संपत्तियों को सरकार द्वारा जब्त किया जाने लगा था। साल 2020 में लखनऊ के डालीबाग में बनी मुख्तार अंसारी की 2 मंजिला इमारत को सरकार के आदेश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के द्वारा ज़मीदोज़ कर दिया गया।

यहां तक की कभी मुख्तार अंसारी के गढ़ रहे मऊ, गाजीपुर, और वाराणसी में भी उसकी सभी अवैध संपत्तियों पर सरकार द्वारा बुलडोजर चलवा दिया गया।

अब देखने वाली बात यह है की जिस तरह से उत्तर प्रदेश की सरकार मुख्तार अंसारी को पंजाब के रोपड़ की जेल से उत्तर प्रदेश के बांदा की जेल ले आई है तो कितनी जल्दी वो मुख्तार अंसारी पर चल रहे मुकदमों पर कार्यवाही करती है। जिस तरह से मुख्तार अंसारी के परिवार ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, मुख्तार अंसारी की सुरक्षा भी प्रदेश सरकार के लिए एक कठिन चुनौती की तरह ही होगी। 

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