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Hindi Kahaniyan Shiv-Parvati The True Love Story

शिव-पार्वती (एक अनोखी प्रेम गाथा)

Shiv Parvati
शिव-पार्वती जो कि हमारे हिन्दू धर्म के बहुत ही असाधारण और पूजनीय देवी देवता हैं, इनके बारे में अनेक कथाएँ और गाथायें आपको सुनने और पढ़ने में आयी होंगी, पर क्या आप जानते हैं कि इनकी अनोखी प्रेम गाथा सिर्फ कहानी और किस्सा नहीं बल्कि सदियों पुरानी एक हकीकत है। 

आजकल सोशल मीडिया पर तरह तरह का ट्रेंड आ जाता है, जैसे कोई त्यौहार या जयंती होने पर हजारों फोटोज और वीडियोस ट्रेंडिंग हो जाते हैं, उदाहरण के लिए अभी हाल में ही महाशिवरात्रि पर लोगों ने अलग अलग तरीके से ये त्यौहार मनाया। 

किसी ने शिव-पार्वती की फोटो तो किसी ने शिव जी की विष पीते हुए, तांडव करते हुए या फिर चिलम पीते हुए की फोटो अपनी अपनी स्टोरी और पोस्ट में शेयर की लेकिन शायद ही बहुत काम लोग जानते होंगे कि शिव-पार्वती या फिर शिव जी का असली रूप क्या था या उनकी जिंदगी की सच्चाई और असल पहलू क्या थे ?

शिव-पार्वती असल में सिर्फ एक नाम नहीं एक देवी-देवता नहीं बल्कि एक एहसास हैं, शिव-पार्वती असल में एक बंधन है ऐसा पवित्र बंधन जो हमको सच और सच्चाई पर चलने की राह दिखता है और हमको सही मायने में सच्चे प्रेम और पवित्रता से रूबरू कराता है।  
Hindi Kahani
शिव-पार्वती विवाह कोई साधारण विवाह नहीं था। प्रेम, समर्पण और तप की परिणति था। शिव-पार्वती विवाह दुनिया की बड़ी से बड़ी लव स्टोरी इस कहानी के आगे फेल है। जितनी नाटकीयता और उतार-चढ़ाव शिव-पार्वती प्रेम कहानी में है, वो दुनिया की सबसे हिट रोमांटिक फिल्म में भी नहीं होगी। 

एक अनोखी प्रेम कहानी की शुरुआत 

भगवान शिव जैसी उदारता दुनिया के किसी और देवी-देवता में विरल है, भगवान शिव को आशुतोष कहते हैं यानी तुरंत प्रसन्न हो जाने वाला। जब भी कोई राक्षस तपस्या में जुटता था, इंद्र देव के कान खड़े हो जाते थे. देवराज बाकी देवताओं के साथ मिलकर बाकायदा ताक झाँक करते थे कि भगवान शिव किसी राक्षस को वरदान ना दे, लेकिन देने के मामले में शिव जी ने कभी भेद नहीं किया। 

शिव-पार्वती प्रेम कहानी एक जन्म की नहीं है, देवी पार्वती पिछले जन्म में भी शिव की पत्नी थी, तब उनका नाम सती था और वे प्रजापति दक्ष की बेटी थी। दरअसल नारद मुनि और ब्रह्मा जी ने दक्ष पुत्री सती को कहा कि तुम अनादि देव भगवान शिव को प्राप्त करोगी।

उसके बाद सती भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए तपस्या में लीं हो गयीं और आखिरकार भगवान शिव और सती का विवाह हो गया मगर इस विवाह से सती के पिता दक्ष खुश नहीं थे। उन्होंने एक यज्ञ किया पर भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। 
Sati Deh Tyaag
परम प्रतापी राजा दक्ष ने जानबूझकर अपने दामाद शिव को अपमानित किया, और ये अपमान सती को रास नहीं आया जिससे आहत को होकर सती अगले जन्म में भगवान शिव को फिर प्राप्त करने की बात कहकर हवनकुंड में कूद गईं और अपनी देह का त्याग कर दिया। सती के वियोग में शिव में विरक्ति का भाव भर दिया और वे तपस्या में लीन हो गए। 

भगवान शिव का विलाप 

भगवान शिव को जब सती के देह त्याग का पता चला तो वो इतना क्रोधित हो उठे कि उन्होंने वीरभद्र को यज्ञस्थल पर भेजा और यज्ञ विध्वंस करा दिया। सती की देह को देख भगवान शिव विलाप में डूब गये। भगवान शिव ने सती को अपने हाथों में उठाया और विलाप करते चले गए। 

भगवान शिव का विलाप और मौन देख कर समस्त देवी देवता चिंतित हो उठे, तब भगवान विष्णु ने विचार किया कि अगर भगवान शिव इसी तरह शोक और विलाप में डूबे रहे तो सृष्टि का क्या होगा? उन्होंने अपना सुदर्शन चक्र चलाकर सती की देह के टुकड़े कर दिए ताकि भगवान शिव शोक और विलाप से बाहर निकल सकें। 
Shiv Vilaap
सती की देह के 51 टुकड़े हुए और वो 51 टुकड़े जहाँ जहाँ गिरे वो 51 जगह शक्तिपीठ कहलाये। 

शिव-पार्वती प्रेम कहानी मिलन 

भगवान शिव को अगले जन्म में प्राप्त करने का संकल्प ले कर देह त्यागने के बाद सती ने पार्वती के रूप में हिमालय के घर में फिर जन्म लिया। नारद मुनि ने देवी पार्वती को फिर एक बार याद दिलाया कि भगवान शिव ही तुम्हारे पति होंगे। ये जानने पर हिमालय पुत्री देवी पार्वती ने घोर तप किया।  

भगवान शिव ने देवी पार्वती के प्रेम को परखने के लिए सप्तऋषियों को भेजा, और सप्तऋषियों से प्रेम कथा सुन कर भगवान शिव समाधिस्त हो गए। देवताओं ने भगवान शिव का ध्यान भंग करने के लिए कामदेव को भेजा तो भगवान शिव ने उन्हे भस्म कर दिया। लेकिन देवी पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए तप जारी रखा। 

आखिरकार भगवान शिव को पिघलना पड़ा और वे नंदी पर सवार होकर नंगे बदन पर भभूत मले बड़े ठाठ से बारात लेकर आए। बारातियों की शक्ल में थे नाचते-गाते गण यानी अनगिनत भूत-पिशाच, दुनिया के तमाम पशु-पक्षियों से लेकर कीड़े-मकोड़े तक की इस बारात में उपस्थिति रही। 
Shiv Parvati
आखिर वो पशुपतिनाथ यानी समस्त पशुओं के देवता शिव का विवाह जो था। शिवजी से विवाह करके पार्वती उनके साथ कैलाश पर चली गई और इस तरह दो जन्मों से चल रही एक प्रेम कहानी की हैप्पी एंडिंग हुई। 

एक अनोखा बंधन एक अनोखा संसार 

आज के बड़े नेताओं की तरह भगवान शिव ने कभी कोई पॉलिटकली कैरेक्ट फैसला नहीं लिया। भक्त चाहे ईश्वर हो या राक्षस, जिसने मांगा उसे मिला, चाहे वो भस्मासुर ही क्यों ना हो।अमृत औरो में बांटा और विष खुद पी गये, भला कहां होगा पूरा दुनिया में कोई ऐसा दूसरा। सामूहिकता भगवान शिव का एक और गुण है, जो बहुत कम देवी-देवताओं में है। 

शिवजी कोई ऐसी तस्वीर ट्रेंड नहीं कर रही है, जिसमें वे नव-विवाहित जोड़े के रूप में माता पार्वती के साथ हों।  ज्यादातर तस्वीरों में शिवजी दिखाई दे रहे हैं अपने पूरे परिवार के साथ, लाइक ए कंप्लीट फैमिली मैन। 
शिव महापरिवार की तस्वीर देखता हूँ तो जेहन में एक बात कौंधती है, दुनिया में इतनी विलक्षण कोई और तस्वीर नहीं है।
Shiv Parvati parivar
भगवान शिव का वाहन नंदी है, जो एक बैल है देवी पार्वती का वाहन शेर है, लेकिन शेर नंदी बैल को देखकर लार नहीं टपकाता। तस्वीर में गणेश भी हैं और उनके साथ उनका वाहन नन्हा मूषक मौजूद है, लेकिन भगवान शिव के गले का सांप चूहे को निगलने के लिए नहीं दौड़ता है। 

कार्तिकेय का वाहन मोर है, वही मोर जिसका प्रिय भोजन सांप है। लेकिन मोर कभी सांप पर झपट्टा नहीं मारता। सब एक-दूसरे के साथ खड़े हैं, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का कोई दूसरा ऐसा उदाहरण आपने कहीं देखा है?
शिव महापरिवार की तस्वीर ये बताती है कि जब तक सह-अस्तित्व है, तभी तक सृष्टि है। जहां सह-अस्तित्व नहीं है, वहां विनाश है। 

सावन के महीने में सड़क पर हुड़दंग करते और राह चलते लोगो को पीटते कांवड़ियों को देखता हूं तो मन में सवाल उठता है- क्या इन लोगों ने कभी शिव महापरिवार की तस्वीर देखी है? यकीनन नहीं देखी होगी. अगर देखते तो उन्हे समझ में आता कि सभी जीवों का सम्मान ही शिवभक्ति का सार है। 

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